छत्तीसगढ़
साइबर ठगों को बैंक खाते और सिम उपलब्ध कराने वाला गिरोह पकड़ा, 8 आरोपी गिरफ्तार
Shantanu Roy
7 Oct 2026 10:51 PM IST

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छग
Bhilai. भिलाई। कमीशन के लालच में साइबर अपराधियों को बैंक खाते, एटीएम कार्ड और सिम उपलब्ध कराने वाले गिरोह के खिलाफ दुर्ग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। एसीसीयू और जिले के पांच थानों की संयुक्त टीम ने कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल लाखों रुपये की रकम खपाने के लिए किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार साइबर ठग ठगी की रकम सीधे अपने बैंक खातों में नहीं मंगाते थे। इसके बजाय म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था, ताकि रकम के असली स्रोत और साइबर अपराधियों की पहचान छिपी रहे। इसके लिए स्थानीय लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते और उससे जुड़ी जरूरी चीजें ली जाती थीं।
जांच में यह भी सामने आया कि खाताधारकों को करीब 2 हजार रुपये से लेकर 15 हजार रुपये तक कमीशन देने का प्रलोभन दिया जाता था। इसके बदले उनसे बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और खाते से लिंक सिम कार्ड ले लिए जाते थे। इसके बाद बीच में सक्रिय एजेंट इन बैंक खातों को साइबर अपराधियों तक पहुंचाते थे। पुलिस के मुताबिक एजेंट म्यूल खाते उपलब्ध कराने के बदले साइबर अपराधियों से 15 से 20 हजार रुपये तक की रकम लेते थे। इन खातों में ऑनलाइन ठगी से प्राप्त रकम ट्रांसफर की जाती थी। बाद में अलग-अलग माध्यमों से रकम को निकालकर या दूसरे खातों में भेजकर उसका लेन-देन किया जाता था।
दुर्ग पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान के बाद नेवई, पुरानी भिलाई, पाटन, भिलाई नगर और छावनी थाना क्षेत्रों में अलग-अलग कार्रवाई की। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 317(4), 318(2) और 318(3) के तहत प्रकरण दर्ज किए गए हैं। कार्रवाई के दौरान महादेव साहू निवासी दुर्ग, पीलू खिलाड़ी निवासी सुरपा, विराज कुमार पोल निवासी रिसाली, नीरज कुमार प्रसाद निवासी सेक्टर-7 और राबिन सिंह निवासी सेक्टर-7 को गिरफ्तार किया गया। इनके अलावा विशु बंजारे निवासी उतई, नवीन ठाकुर निवासी सुपेला और टिकेश्वर प्रसाद चन्द्राकर निवासी पुरानी भिलाई को भी पुलिस ने पकड़ा है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अलग-अलग बैंकों की पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन और सिम कार्ड जब्त किए हैं। इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खातों का इस्तेमाल कितने साइबर अपराधों में किया गया और इनके माध्यम से कुल कितनी रकम का लेन-देन हुआ। इसके साथ ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य एजेंटों और साइबर अपराधियों की पहचान भी की जा रही है।
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